Friday, March 23, 2007

हैदराबादी कविता

हाथा मे हाथ मिलाके
हाथा मे हाथ मिलाके
अंगूठी चुराके उनो चली गयी
अभी गले मिलनेकू आरी
क्या करती की क्या की...

चाय पीनेकू आके
चाय पीनेकू आके
सॉसर चुराके उनो चली गयी
अभी फुल मिल्सकू आरी
क्या करती की क्या की...

पहलीच मुलाकातमे
पहलीच मुलाकातमे
फाय स्टार मे मेरेकू चुना लगाई
अभी डेट पे ले जाओ बोलरी
क्या करती की क्या की...

सगाई-सगाई बोलके
सगाई-सगाई बोलके
पूरी शॉपिंग कराली
अभी शादी-शादी बोलरी
क्या करती की क्या की...


स्वरचित नाही. (Email forward)

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5 Comments:

At 2:14 PM, March 23, 2007 , Blogger yogesh said...

:)

 
At 3:29 PM, March 23, 2007 , Blogger Anand Sarolkar said...

Hahaha...simply hilarious!

 
At 7:24 PM, March 23, 2007 , Blogger Abhijit Dharmadhikari said...

ahe aahe ! kevaL jabaree!:-)

 
At 11:43 PM, March 26, 2007 , Blogger Ranjeet Adkar said...

Sahich Aahe!

 
At 2:54 PM, June 07, 2007 , Blogger Abhijeet Hirap said...

Very goooood.
I like marathi charolya kavita aani katha.........

 

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